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26 साल बाद फिर पहनी CRPF की वर्दी, संत बन चुके गिरवर सिंह की अनोखी वापसी

मुरैना से सचिन कुमार मिश्रा की रिपोर्ट

मुरैना के छिछावली गांव निवासी गिरवर सिंह पुत्र दामोदर सिंह तोमर को किशोरावस्था से ही सेना में भर्ती होने का जुनून था। उन्होंने कम उम्र से ही भर्ती की तैयारी शुरू कर दी थी। कड़ी मेहनत के बाद साल 1991 में उनका चयन सीआरपीएफ में हवलदार के पद पर हुआ।

करीब 8 साल तक उनकी नौकरी सामान्य रूप से चली। प्रमोशन की सूची में भी उनका नाम आने वाला था, लेकिन साल 1999 की शुरुआत में सीआरपीएफ के एक बड़े अधिकारी से उनका विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ा कि पहले उन्हें निलंबित किया गया और बाद में विभागीय जांच बैठा दी गई। जांच के बाद 21 अक्टूबर 1999 को गिरवर सिंह को सीआरपीएफ से बर्खास्त कर दिया गया।

नौकरी जाने के बाद कुछ समय तक वह घर पर रहे, लेकिन मानसिक रूप से परेशान रहने लगे। इसके बाद वह अपने गांव से करीब एक किलोमीटर दूर स्थित बारहद्वारी मंदिर में रहने लगे। यहां उन्होंने करीब चार-पांच साल बिताए। बाद में करीब 20 साल पहले वह मुरैना के गुफा मंदिर पहुंच गए।

गुफा मंदिर में उन्होंने संत का जीवन अपना लिया। वह मंदिर में पूजा-पाठ करने के साथ पुजारी की सेवा करने लगे। मंदिर के मुख्य पुजारी ने उन्हें **‘गिरवरदास महाराज’** नाम दिया। देखते ही देखते सीआरपीएफ का यह पूर्व जवान संत के रूप में मंदिर में रहने लगा।

### कोर्ट की लड़ाई ने 26 साल बाद दिलाई नौकरी

बर्खास्तगी के खिलाफ गिरवर सिंह ने साल 1999 में इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। साल 2007 में कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया, लेकिन सीआरपीएफ ने इस फैसले के खिलाफ स्टे ले लिया।

इसके बाद गिरवर सिंह ने हाईकोर्ट की डबल बेंच में अपील की। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 28 अगस्त 2025 को कोर्ट ने सीआरपीएफ को आदेश दिया कि तीन महीने के भीतर गिरवर सिंह को दोबारा ज्वाइनिंग दी जाए।

हालांकि कोर्ट के आदेश के बाद भी उन्हें समय पर ज्वाइनिंग नहीं मिली। इसके बाद गिरवर सिंह की ओर से कोर्ट और वकीलों के माध्यम से नोटिस जारी करवाए गए। सीआरपीएफ ने 26 साल पुराने मामले की फाइलें तलाशने में समय लगने का तर्क देते हुए राहत मांगी।

आखिरकार **26 अगस्त 2026 को सीआरपीएफ ने गिरवर सिंह को दोबारा नौकरी पर रखने का आदेश जारी कर दिया।** उन्हें छत्तीसगढ़ के बीजापुर में पोस्टिंग दी गई है।

एक समय सीआरपीएफ की वर्दी में देश की सेवा करने वाले गिरवर सिंह अब 26 साल बाद फिर उसी वर्दी में लौट आए हैं। हालांकि उनका संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। गिरवर सिंह का कहना है कि अब वह अपने **प्रमोशन के लिए भी कानूनी लड़ाई लड़ेंग

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