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बस विश्वनाथ टूर एंड ट्रैवल्स की थी। नंबर UP 83 AT 3789।

फिरोजाबाद से जिलासंवाद सोनू पंडित जी की रिपोर्ट

मालिक फिरोजाबाद के अनिल जादोन। ड्राइवर कुलदीप शर्मा, कानपुर देहात के लाडपुर पैठ वाले। कंडक्टर संदीप, कानपुर नगर का। दोनों यूपी के, दोनों “काम पर” थे। बस रिपेयरिंग के लिए दिल्ली भेजी गई थी। मालिक खुद मानते हैं—पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराया। सीसीटीवी काम नहीं कर रहा था। खिड़कियों पर मोटे पर्दे थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की खुली धज्जियाँ।

16 साल की मैनपुरी की छात्रा घर से नाराज निकलकर चचेरे भाई के पास जा रही थी। बारिश थी। एक बस रुकी। सेक्टर-63 छोड़ने का भरोसा दिया। इसके बाद बस 47 किलोमीटर चली बिना रुके, बिना चेकिंग के, कई सीसीटीवी पॉइंट्स और पुलिस चौकियों के सामने से निकलती हुई। अंदर क्या हो रहा था, बाहर किसी को दिखने का इंतज़ाम नहीं था। पर्दे ने देखना बंद कर दिया था। सिस्टम ने पूछना बंद कर दिया था।

पुलिस ने 31 अगस्त को जानकारी दी। घटना 4 अगस्त की। करीब चार हफ्ते बाद। गिरफ्तारी तिमारपुर की पार्किंग से हुई। बस जब्त हुई।

निर्भया के बाद बनी गाइडलाइंस का क्या हुआ? स्लीपर बस में पर्दा क्यों? खाली बस रात में बिना परमिट-चेक के क्यों दौड़ रही थी? 23 दिन में कई चालान, हजारों का जुर्माना फिर भी सड़क पर। रिपेयरिंग के नाम पर कैमरा बंद, स्टाफ अनवेरिफाइड। मालिक कहता है जानकारी पुलिस को दे दी। दे दी, जब वारदात हो चुकी।

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