तुम लौटकर आ जाओ कुलदीप…. बुझ गया घर का इकलौता चिराग: भीषण सड़क हादसे ने छीनीं परिवार की खुशियां, बदायूं के ग्राम पलिया कुलदीप शर्मा की नोएडा में दर्दनाक मौत
किस्मत का खेल भी कितना निराला और क्रूर होता है। जो बेटा घर और पिता की लाठी बनने का सपना लेकर घर से निकला था, वह आज कफन में लिपटकर घर लौट रहा है। बदायूं जिले के थाना उघैती क्षेत्र के ग्राम पलिया निवासी कुलदीप शर्मा (पुत्र राजू शर्मा) की नोएडा में हुई एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है।
सपनों की तलाश में गए थे नोएडा,

कुलदीप अपने घर के इकलौते चिराग थे। पांच बहनों के अकेले भाई और बीमार पिता की आखिरी उम्मीद। 6 दिन पहले बीते 29 अप्रैल को ही कुलदीप ने अपनों की आँखों में सुनहरे भविष्य के सपने सजाकर नोएडा का रुख किया था। उन्हें क्या पता था कि अधिक पैसे कमाकर घर की खुशियों में चार चाँद लगाने की चाहत उन्हें मौत के करीब ले जा रही है।
शराब के नशे ने उजाड़ दिया हंसता-खेलता परिवार…
मिली जानकारी के अनुसार, बीती रात करीब 10 से 11 बजे के बीच कुलदीप नोएडा में सड़क किनारे अपनी बाइक पर बैठकर किसी का इंतजार कर रहे थे। तभी काल बनकर आई एक तेज रफ्तार अनियंत्रित स्कॉर्पियो ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि स्कॉर्पियो चालक शराब के नशे में धुत था। टक्कर इतनी भीषण थी कि कुलदीप की शर्ट कार में फंस गई और वह काफी दूर तक सड़क पर घिसटते चले गए। जब अनियंत्रित कार डिवाइडर से टकराई, तब कुलदीप का सिर सीधे डिवाइडर से जा लगा, जिससे उनकी दर्दनाक मौत हो गई।
टूट गई पिता की रीढ़, बहनों का रो-रोकर बुरा हाल
कुलदीप की मौत की खबर मिलते ही पलिया गांव में कोहराम मच गया। पिता राजू शर्मा, जो पहले से ही रीढ़ की हड्डी की बीमारी से जूझ रहे हैं, इस खबर के बाद बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़े। ग्रामीणों का कहना है कि कुलदीप सिर्फ बेटा नहीं, अपने बीमार पिता की रीढ़ की हड्डी था, जो आज टूट चुकी है।
पांच बहनों में से तीन की शादी हो चुकी है, कुलदीप की शादी हो चुकी है लेकिन उनकी कोई संतान नहीं थी। आज उनके जाने के बाद पत्नी और पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
राजनीतिक क्षेत्र में भी थी सक्रिय पहचान
कुलदीप शर्मा न केवल एक जिम्मेदार बेटे थे, बल्कि सार्वजनिक जीवन में भी सक्रिय थे। वे भारतीय जनता पार्टी के पूर्व युवा मंडल अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके थे। उनकी मृदुभाषी छवि के कारण आज हर आँख नम है।
गांव की चौखट पर बैठी बहनें आज भी दरवाजे की ओर टकटकी लगाए देख रही हैं। उन्हें पता है कि उनका भाई अब कभी लौटकर नहीं आएगा, लेकिन ममता और स्नेह का यह बंधन उन्हें इस कड़वे सच को स्वीकार करने नहीं दे रहा। इस हादसे ने एक बार फिर नशे में ड्राइविंग के खौफनाक अंजाम को सामने लाकर खड़ा कर दिया है।
प्रभु दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान कर अपने श्री चरणों में स्थान देना… और परिवार को दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करना…
