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*मेडिकल कॉलेज सहित सरकारी अस्पतालों से घायलों को रेफर किए जाने के आंकड़ों की समीक्षा किए जाने की जरूरत*

*बार-बार रेफर करने से घायलों को इलाज न मिल पाने के बाद खून अधिक निकल जाने से मरीजों की लगातार हो रही मौत चिंता का विषय*

*कौशांबी* सड़क हादसे में घायल हुए लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और मेडिकल कॉलेज जिला अस्पताल से लेकर ट्रामा सेंटर तक आपातकालीन स्थिति में इलाज नहीं मिलता है घायल मरीजों को स्वास्थ्य कर्मी गंभीर बता कर उन्हें प्रयागराज रेफर देते हैं घायल मरीजों को सरकारी अस्पताल से बार-बार रेफर किए जाने से खून अधिक निकल जाता है जिससे या तो रास्ते में उनकी मौत हो जाती है या फिर मरीज के मजबूर परिवार के लोग उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती करते हैं जिससे मरीजों के मौत के आंकड़े बढ़ रहे हैं जिले के विभिन्न क्षेत्र में स्थापित 27 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तो पूरी तरह से बेकार साबित हो रहे हैं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र वार्ड बॉयय और फार्मासिस्ट के सहारे चल रहा है कुछ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तो फार्मासिस्ट भी नहीं पहुंचते हैं एक दर्जन ग्रामीण क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मे कई कई महीने बीत जाने के बाद डॉक्टर नहीं पहुंचते हैं जिससे इलाज करने की बात दूर रही डॉक्टर के न रहने से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में अब मरीज भी नहीं पहुंच रहे हैं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कुछ समय के लिए डॉक्टर रहते हैं लेकिन अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करने के बजाय सड़क हादसे में घायल को गंभीर बता कर मेडिकल कॉलेज रेफर कर देते हैं सवाल उठता है कि जिले के आठ विकासखंड में स्थापित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों के इलाज के लिए संपूर्ण सुविधा उपलब्ध है प्रत्येक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कई डॉक्टर की डियूटी है तो फिर इलाज करने के बजाय घायल मरीजों को रेफर क्यों किया जाता है सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बात निराली है मेडिकल कॉलेज जिला अस्पताल में भी तमाम डॉक्टरों की तैनाती है लेकिन मेडिकल कॉलेज जिला अस्पताल में भी घायल मरीजों का इलाज करने के बजाय उन्हें प्रयागराज रेफर कर दिया जाता है इससे मरीज को लंबे समय तक इलाज नहीं मिल पाता और घायल मरीजों का खून इतना अधिक बह जाता है कि उनकी गंभीर न होते हुए भी गंभीर हो जाती है मजबूर होकर परिवार के लोग घायलों को निजी अस्पताल में भर्ती करते हैं जहां तमाम मरीज की मौत हो जाती है प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और मेडिकल कॉलेज जिला अस्पताल से प्रतिदिन कितने मरीज प्रयागराज रेफर किए जा रहे हैं और रेफर करने के पीछे इन अस्पतालों की क्या समस्याएं हैं इस बात की बिस्तृत समीक्षा किए जाने की जरूरत है यदि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और मेडिकल कॉलेज से रेफर किए गए मरीजों की संख्या और उसके कारण की बिस्तृत समीक्षा जिला अधिकारी ने कराई तो सरकारी अस्पताल के तमाम डॉक्टर के चेहरे बेनकाब होंगे और सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था में सुधार होगा
*मदन कुमार केशरवानी

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