जामा मस्जिद के सर्वे विरोध में हुई हिंसा के प्रकरण में सोमवार को पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई को न्यायालय में तलब किया गया। यहां पर आरोपित पक्षों के पांच अधिवक्ताओं ने अलग-अलग बयान दर्ज करते हुए हिंसा से जुड़े 100 से अधिक सवाल दागे, जिनका पुलिस अधीक्षक ने जवाब देते हुए पूरी घटना का बयान किया।
19 नवंबर 2024 को संभल की शाही जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर होने का दावा सिविल सीनियर डिवीजन कोर्ट चंदौसी में पेश किया गया। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन शाम को पहले चरण का सर्वे हुआ और दूसरे चरण का सर्वे 24 नवंबर 2024 को किया गया था।
सर्वे के विरोध में हिंसा हुई थी, जिसमें चार लोगों की हत्या कर दी गई थी। इस प्रकरण में ही सोमवार को जिला न्यायालय परिसर में एडीजे पाक्सो कोर्ट के न्यायाधीश अवधेश कुमार सिंह की अदालत में पुलिस अधीक्षक के बयान दर्ज किए गए। न्यायालय के आदेश पर ही एसपी हिंसा से संबंधित थाना नखासा में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 304/2024 में गवाही दी।
जिला शासकीय अधिवक्ता आदित्य कुमार सिंह ने एसपी के बयान दर्ज कराए, जबकि अभियुक्तों की ओर से अधिवक्ता जकी अनवर, आफ़ताब हुसैन, कमर हुसैन, जमाल पाशा और मसूद अली फारुखी ने उनसे सवाल किए।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि मुकदमा अपराध संख्या 304/2024 में एसपी और उनके पीआरओ सहित अन्य पुलिसकर्मियों पर फायरिंग की गई थी। इस घटना में एसपी के पैर में छर्रे लगे थे। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि दोपहर 12 से शाम छह बजे तक बयान दर्ज किए गए हैं।
