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धान भारत ही नही अपितु संपूर्ण विश्व की एक महत्वपूर्ण फसल है! जो आपातकाल मे मानव मात्र की मदद भूखे पेट को भरने मे मदद करती है! ठीक उसी प्रकार मानव जीवन भी अपना ही नही अपितु संपूर्ण विश्व मे ज्ञान और कार्य शैली का अहम बिंदु माना जाता है! उसी प्रकार नये अवसर प्रदाता के रूप मे भी जाना जाता है! भारत जैसे देशों मे धान की फसल को पानी की अधिक आवश्यकता होती है लेकिन  वही बात अगर इसराइल जैसे अनेक देशों की करे तो तकनीकी प्रयोग करके कम पानी मे भी धान का बखूबी उत्पादन होने लगा है!  ठीक उसी प्रकार मानव जीवन है संपूर्ण विश्व के पदार्थ की आकांक्षा रखता है और संपूर्ण विश्व का वैभव भी अपने पास देखने की लालसा रखता है, लेकिन जब तकनीकी रूपी ज्ञान की उत्पति मानव मे हो जाती है तब बहुत कम मे संतोष रूपी प्रवृति मे अपने आपको सुखी मानकर अपने कार्य करने लगता है!  धान और चावल के अंतर की बात करे तो सिर्फ धान के ऊपर का छिलका निकाल देने पर चावल प्राप्त हो जाता है! ठीक ऐसा ही मानव स्वभाव है जब मानव अपने ऊपर से अज्ञान ( अंधकार) रूपी पर्दे को हटाकर देखता है तब उसे संपूर्ण जगत का सत्य(प्रकाश) दिखाई देने लगता है, धान के छिलके और चावल के स्वाद मे अंतर होता है उसी प्रकार मानव द्वारा ग्रहण किया गये ज्ञान और अज्ञान मे भी अंतर होता है! मानव जिसे चाहे अपना ले या त्याग दे! धान और चावल का संपूर्ण जीवन पानी के संग ही रहता चलता और देता है! ठीक उसी प्रकार मानव के जीवन मे उसी पानी का खेल उत्पति से अंत तक सहयोगी बनता है! सम्पूर्ण लेख का सारांस मानव जीवन से संबंधित है, अगर मानव धान की फसल के एक दाने से शिक्षा लेना चाहे तो वह भी मानव को ज्ञान रूपी गंगा के उदगार का कारण बन सकता है! 

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