एक गुरु अपने शिष्य से बोला जाओ बालक मुझे दही और शक्कर खाने की इक्छा हो रही है! अच्छी तरह से मिलाकर लाओ, शिष्य जाता है और मिलाकर ले आता है! गुरु ने बोला अब इसे फेक दो
शिष्य के मन मे उठने वाले प्रश्न मे, पहला- आप ने ही बोला था, दूसरा प्रश्न – मैने कोई गलती नही की, तीसरा प्रश्न – आप के बोलने के अनुसार बनाया था फिर क्यो बोला कि फेक दो, चौथा प्रश्न- मैने कोई गलती की होगी, पांचवा प्रश्न- चुप रह जाना अहंकार खत्म होने का सही उत्तर है, ऐसे शिष्य आज्ञकारी और अहंकार मुक्त होते है यही मानव मात्र मे स्वयम की पहिचान का तरीका है!