मानव ही अपनी जिंदगी का मुख्य कार्यपालन अधिकारी है! जो कार्य मानव को करना होता है उसके फैसले मानव स्वयं ही लेता है! लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि उसका ध्यान कहा है! एक उदाहरण को देकर समझाने का प्रयास करते है! एक अमुक नाम के व्यक्ति से बोला गया कि कल आप को बाजार जाना है और देख कर आना है कि बाजार मे क्या कैसा रखा है! जो अमुक व्यक्ति बाजार देखने जाता है उस अमुक व्यक्ति के हाथ मे एक दीपक जलाकर दे दिया जाता है और साथ मे तीन चार नग्न तलवार वालों को साथ मे लगा दिया जाता है कि अगर दीपक बुझें तो इनकी गर्दन अलग कर देना! जब वह व्यक्ति पूरा बाजार घूम कर आया तो पूछा गया कि आप ने क्या देखा तो व्यक्ति ने उत्तर देते हुए बताया कि मैने दीपक ही देखा है! अगर दीपक की परवाह नही करता तो पूरा बाजार देख सकता था! लेकिन मृत्यु के भय के कारण दीपक ही देख पाया ! कहने का अर्थ है कि की आप जिस किसी पर भी ध्यान को एकाग्र करेगे! वह प्रत्येक वस्तु आप को स्वतः ही प्राप्त हो जायेगी! लेकिन शर्त है कि आप को वह कार्य प्रमुखता के साथ करना होगा